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शेयर बाजार का इतिहास देश में शेयर बाजार की शुरुआत वैसे तो साल 1857 से भी पहले हो गई थी। लेकिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE की शुरुआत साल 1875 में हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज था। हालांकि शुरुआती दौर में इसे नेटिव शेयर और स्टॉक ब्रोकिंग एसोसिएशन के नाम से जाना जाता था। भारत में स्टॉक मार्केट की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी के आने के साथ हुई थी। जो ब्रिटिश लोग भारत के साथ व्यापार करना चाहते थे, उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी। वहीं दुनिया में सबसे पहले स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत अमेरिका में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के रूप में साल 1792 में हुई थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के संस्थापक में सबसे बड़ा नाम प्रेमचंद रायचंद का था। जिन्हें पूरे देश में ‘कपास किंग’ कहा जाता था। प्रेमचंद रायचंद और दूसरे 21 व्यापारियों ने केले के एक पेड़ के नीचे बैठ कर पहली सौदेबाजी की थी। मुंबई स्टॉक एक्सचेंज जिस गली में है उसे ‘दलाल स्ट्रीट’ कहा जाता है। साल 1928 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की बिल्डिंग बनी थी। पिछले करीब एक सदी से ये भारत के शेयर बाजार का प्रतीक है। धीरुभाई अंबानी के व्यापार में सक्रिय होने के बाद लोगों ने स्टॉक एक्सचेंज और शेयर मार्केट पर ध्यान देना शुरू कर दिया था। धीरुभाई अंबानी देश के पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने आम आदमी को इससे जोड़ा था। हालांकि शेयर बाजार की लोकप्रियता नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के आने से और ज्यादा हुई। NSE भारत का सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से अग्रणी स्टॉक एक्सचेंज है। यह भी BSE की तरह मुंबई में स्थित है। इसकी स्थापना 1992 में हुई थी। कारोबार के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसके वीसैट (VSAT) टर्मिनल भारत के 320 शहरों तक फैले हुए हैं। NSE की इंडेक्स- निफ्टी 50 का उपयोग भारतीय पूंजी बाजारों के बैरोमीटर के रूप में भारत और दुनियाभर के निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है। उसी तरह BSE का सेंसेक्स इंडेक्स बैरोमीटर के रूप में भारत और दुनियाभर में लोकप्रिय है।
 

 

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